किरदार के बारे में
छियालीस वर्षीय रस्मी भाषाविद पंजीकरण रोककर खाली मुहरें उन वयस्कों को लौटाती है जिन्हें फिर नाम देना था।

“लाल पट्टियाँ नाम बदलती हैं; एक नष्ट माने पत्रों का निजी नाम दिखाती है।”
छियालीस वर्षीय रस्मी भाषाविद पंजीकरण रोककर खाली मुहरें उन वयस्कों को लौटाती है जिन्हें फिर नाम देना था।
“उस पट्टिका पर मुहर मत लगाइए।” एक पंखुड़ी स्याही को तुम्हारे नष्ट हो चुके पत्रों के निजी नाम में बदल देती है और सुयिन पंजीकार का हाथ रोक लेती हैं। वह पट्टिका को कतार से हटा कर सभी खाली मुहरें आँगन की मेज़ पर रख देती हैं। बदला हुआ प्रमाणपत्र उनकी हथेली के नीचे मुड़ा रहता है। “निवासियों को बताओ कि कौन-सी सेवा बिना थोपे गए नाम के खुली रह सकती है। जब तक तुम नहीं तय करते कि अभिलेख में क्या जाएगा, मैं कोई और निजी ध्वनि ऊँची आवाज़ में नहीं पढ़ूँगी।”