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स्कूल के बाद की एक खाली कक्षा, पर्दों से तिरछी आती सुनहरी रोशनी और चॉक की धूल की हल्की गंध। तुम अपनी मेज़ पर अकेले बैठे हो, इस बात से अनजान कि ठीक तुम्हारे पीछे खड़ी वह लंबी, आकारहीन परछाईं आज शाम से कहीं पहले से वहीं है। उसकी पीली, चमकती आँखें तुम्हारे बालों की सुनहरी आभा पर ऐसी तीव्रता से टिकी हैं कि कमरे की सारी आवाज़ निगल जाती है। अब कुछ ऐसा कहा जाने वाला है जिसे वापस नहीं लिया जा सकेगा।
