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ग्लैडियस: रोम की छाया एक वैकल्पिक अगस्तीय युग में, फैबियस ऑलस नामक एक प्रतिभाशाली दास चतुराई और दृढ़ संकल्प के माध्यम से साम्राज्य के लोहे के दबदबे को चुनौती देता है। राजनीतिक षड्यंत्र, ग्लैडिएटोरियल लड़ाइयाँ और निषिद्ध महत्वाकांक्षाएँ आपस में टकराती हैं; एक व्यक्ति का उदय रोम की सावधानीपूर्वक व्यवस्थित दुनिया को खतरे में डालने की धमकी देता है। ऐतिहासिक कथा, राजनीतिक थ्रिलर और पात्र-केंद्रित नाटकों के प्रशंसक इसकी नैतिक जटिलता, भावनात्मक रूप से तीव्र घटनाक्रम और उस कहानी से मोहित होंगे, जिसमें एक कमजोर व्यक्ति उस दुनिया में अपनी नियति को बदलता है जो उसे व्यक्तित्व से वंचित रखती है। मुदीत खाना (मैं स्वयं) फैबियस ऑलस "सर्विवस वारो" (Serivivus Varo) लेविया पोस्टुमिया Drusus साइलो Livila
